दोस्तों, अब मै आपको एक आश्चर्यजनक एवं अद्दभूत प्रणाली से अवगत कराने जा रहा हूं !
जिसमे अंकों की रहस्यमय गणना से आप ताउम्र सांसारिक एवं व्यावहारीक लाभ उठा सकते है !
जिस पद्धती से मै इस प्रणाली को पेश करने जा रहा हूं, शायद ही किसी ने अंकशास्त्र के इस अनमोल खजाने को पेश किया होगा !
यह प्रत्येक उस स्त्री-पुरूष को सांसारिक एवं व्यावहारीक रूप मे उपयोगी सिद्ध होगी जो शादी जैसे पवित्र बंधनमे बंधने जा रहे है!
मानव प्राणी को भाग्य की चपेट में आकर कई बार मुंह की खानी पडती है! फिर बेबस इंसान भाग्य को कोसते रह जाता है !
ऐसे वाकये तब जिंदगी भर पीछा करते है, जब हम अंकशास्त्र के इस अनमोल खजाने पर विश्वास ना करने की भूल कर बैठते है !
या इसे जानबूझकर अनदेखा करते है !
शुरू - शुरू मे तो यह बात बिल्कुल व्यर्थ लगेगी की कोई भी व्यक्ति आसानी से यह जान सकता है कि जिस व्यक्ति से वह शादी के लिये मिलने जा रहा है उसके साथ उसका संबंध मधुर होगा या नहीं !
इस बात के लिये अंकशास्त्र के कुछ नियमों को जानना, उसका पालन करना जरूरी होता है ! यह पद्धति अंकोंसे संबंधित इन्हीं रहस्यमय खजाने का हिस्सा है !
आप देखेंगे कि मै जिस पद्धति को आपसे कहने जा रहा हूं उससे उन अभिभावकों को यथासंभव लाभ होगा जो आज शादी के दहलीज पर खड़े है
और इस पद्धति का प्रयोग करना चाहते है ! और कुछ मेरी बात से सहमत भी होंगे !
आप इस पद्धति को तब आवश्यक समझेंगे जब अंकशास्त्र की इस अद्भूत देन को समझनेकी चेष्टा करेंगे !
हकीकत तो यह है कि शादी विवाह का संम्बन्ध स्वर्ग मे ही स्थापित होता है! और उसका आधार है नक्षत्र एवं वर्षस्थान !
स्त्री – पुरुषो में संबंध स्थापित कराने मे उन्हींकी अहं भूमिका होती है!
इस बात से बिल्कुल फर्क नहीं पड़ता की, जो शादी करना चाहता है उनका जन्म कौन से वर्ष मे हुआ है!
परन्तु यदि दो व्यक्ति की जन्मतिथि एक जैसी है तो उन दोनों के मध्य एक अलगही आकर्षण एवं सहानुभूती रहती है!
इसमें अपवादस्वरूप अंक है १-४ एवं २–७ जो कि सूर्य एवं चंद्रमा का प्रतिनिधित्व करते है! यही अंक है जो एक दूसरे के प्रति आकर्षित होते है,
जबकि अन्य अंक अपने वर्ग की और आकर्षित होते है! एक ही जन्मांक वाले दो व्यक्तियो के बिच मे जो सबंध बनते है वो शारीरिक की अपेक्षा मानसिकतौर पर अधिक दृढ होते है !
जो दिल को प्रभावित करते है वो समान नक्षत्र एक ही अंक के होते है ! जिससे परस्पर सहानुभूति का रवैया निर्माण होता है !
जब एक ही जन्मांक वाले व्यक्ति का जन्म भी एक ही माह मे हुआ हो तो शारीरिक आकर्षण भलीभांति निर्माण हो जाता है !
अगर ऐसा होता है तो दोनों अंको का मिलाप होनाही चाहीए ! इससे मानसिक और शारीरिक तौरपर वास्तविक आकर्षण निर्माण होगा जिसके परिणामस्वरुप उन दोनोंमे अटूट मैत्रीभाव पनपेगा,
और जिससे शादी जैसा पवित्र बंधन आखिरतक पवित्र ही बना रहेगा ! इसलिए कहते है की शादिया ऊपर तय होती है !
दुनिया के किसी भी हिस्से मे जब दो लोग जन्म लेते है, वो एक दूसरे के लिए भले ही अंजान हो, उनमे भलेही भाषाभेद हो, वो लोग चाहे कितनी भी अनहोनी आये या कोई
कितना भी बड़ा तूफान आए उसे पार करके एक दूसरे को मिलने हेतु बड़ी से बड़ी दुर्घटनाओं को भेदकर यहाँ तक की मृत्यु का भी सामना करने से भी नहीं डरते और एक दूसरे के प्रति आकर्षित होते है !